विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस घोषित किया है। यह कईतरह के ब्लड ग्रुप का पता लगाने वाले वैज्ञानिक डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर के सम्मान में मनाया जाता है। अक्सर लोगों लगता है कि ब्लड डोनेट करके हम दूसरों की जान बचाते हैं जबकि सच ये भी है कि इस बहाने डोनर की सेहत भी सुधरती है। हमारे मन के ब्लड डोनेशन से जुड़े कई भ्रम आते हैं जैसे ब्लड डोनेशन के बाद मैं कोई काम नहीं कर सकता, दवा ले रहा हूं इसलिए रक्तदान नहीं कर सकता है।डॉ. लीना हूडा, ब्लड ट्रांसफ्यूजन स्पेशलिस्ट व मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुरबता रहीं है ब्लड डोनेशन से जुड़े भ्रम-तथ्यों और रक्तदान करते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए...
ब्लड टांसफ्यूजन विशेषज्ञ लीनू हूडा के मुताबिक, एचआईवी, हेपेटाइटिस और टीबी के रोगी रक्तदान नहीं कर सकते हैं। रक्तदान से 14 दिन पहले शरीर का संक्रमणमुक्त होना जरूरी है। ऐसे रोगी डॉक्टरी सलाह के बाद ही रक्तदान करें। प्रेग्नेंट हैं, स्तनपान कराती हैं या अबॉर्शन कराया है तो रक्तदान करने से पहले आयरन की जांच कराएं। मासिक धर्म के दौरान रक्तदान किया जा सकता है।टैटू बनवा रखा है या शरीर का कोई हिस्सा छिदवाया है तो रक्तदान कर सकते हैं। जब टैटू बनवाएं और अंग छिदवाएं तो कुछ घंटे के बाद रक्तदान कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन्स के अनुसार, टैटू बनवाने के 6 महीने के बाद और अंग छिदवाने के 12 घंटे बाद ही रक्तदान करें।ब्लड टांसफ्यूजन विशेषज्ञ लीनू हूडा के मुताबिक, यह बिल्कुल भी सच नहीं है। कई बार महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होता है इसी वजह से उन्हें रक्तदान करने से मना किया जाता है। पर ये बात भी सच है कि भारत में ब्लड डोनर्स में महिलाओं की काफी कमी है। ये सिर्फ 4 पर्सेंट हैं।ये सच नहीं है। दुबले लोग रक्तदान कर सकते हैं। बस इतना जरूर है कि ब्लड डोनेट करना चाहते हैं तो आपका न्यूनतम वजन 50 किग्रा होना चाहिए। इसका शरीर की बनावट से कोई लेना देना नहीं है। अक्सर ऐसा भी होता है कि मोटे लोग ब्लड देने के लिए अयोग्य ठहरा दिए जाते हैं क्योंकि उन्हें कई तरह की बीमारियां होती हैं।ब्लड टांसफ्यूजन विशेषज्ञ लीनू हूडा के मुताबिक, यह भ्रम है। आमतौर एक वयस्क इंसान के शरीर में 5 लीटर खून होता है। रक्तदान के दौरान 450 मिलीलीटर खून निकाला जाता है। एक स्वस्थ इंसान में 24-48 घंटे के अंदर इतना खून वापस बन जाता है। नाको (NACO) के मुताबिक भारत में पुरुष तीन महीने में एक बार और महिलाएं चार महीने में एक बार रक्तदान कर सकती हैं।कई लोगों का मानना है कि शाकाहारी लोग रक्तदान नहीं सकते हैं, यह गलत है। ऐसे लोग जिनमें आयरन की कमी है उन्हें रक्तदान के लिए मना किया जाता है। आयरन रक्त का प्रमुख घटक है। अगर आप संतुलित भोजन खा रहे हैं तो जरूरतभर आयरन की पूर्ति हो जाती है। कई देशों में रक्तदान से पहले हीमोग्लोबिन की जांच करते हैं। हीमोग्लोबिन कम मिलने पर ही डोनर को रक्तदान करने के लिए मना किया जाता है।ये सच नहीं है। ब्लड डोनेशन बिल्कुल आसान प्रक्रिया है। ब्लड लेने के लिए नर्स एक छोटी सी नीडिल आपकी बांह में इंजेक्ट करती हैं। इसका आपको अहसास भी नहीं होता। इसके अलावा कुछ भी नहीं करना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान आपको हल्की सी चुभन महसूस होगी और ट्रांसफर पूरा होने के बाद आप बिल्कुल अच्छा महसूस करने लगेंगे।
ब्लड डोनेट कर रहे हैं तो ये बातें ध्यान रखें
डोनर की उम्र 18-65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वजन 48 किलो से कम नहीं होना चाहिए। रक्तदान से पहले भोजन जरूर कर लें।
प्रेग्नेंसी और माहवारी के दौरान महिलाएं ब्लड डोनेट करने से बचें। इसके अलावा बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं तो रक्तदान न करें।
अगर रक्तदान के दौरान उल्टी लगने, सर्दी लगने, खांसी आने, सिरदर्द, चक्कर और घबराहट जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर को बताएं।
रक्तदान के बाद जहां से ब्लड निकाला गया है वहां से ब्लीडिंग बंद न हो तो कोहनी को मोड़कर रखें और तब तक रखें जब तक ब्लड निकलना बंद न हो जाए।
रक्तदान के बाद अगर प्रभावित हिस्से पर सूजन आती है या नीला पड़ जाता है और ठंडा सेंक करें।
रक्तदान से पहले नींद पूरी लें। अगर रातभर ट्रेवल किया है तो अगले दिन रक्तदान न करें।
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