ऑस्ट्रेलिया के राज्य तस्मानिया के पश्चिमी समुद्री तट के पास करीब 470 पायलट व्हेल फंस गई हैं। रेस्क्यू टीम के मुताबिक, इनमें से करीब 200 पायलट व्हेल के मारे जाने की आशंका है। टीम लगातार यहां फंसी व्हेल्स को रेस्क्यू करने की कोशिश कर रही हैं और उन्हें बुधवार तक वापस समुद्र में छोड़ने की कोशिश जारी है। हालांकि ये बात भी स्पष्ट नहीं है कि इतनी संख्या में व्हेल्स किनारे पर कैसे आईं। यह इतिहास में शायद पहला ऐसा मौका है, जब इतने बड़ी संख्या व्हेल फंसी हैं।

हेलिकॉप्टर से रखी जा रही नजर
बुधवार को करीब 10 किलोमीटर के मैक्वेरी हार्बर समुद्र तट पर हेलिकॉप्टर से नजर रखी गई। तस्मानिया पार्क और वाइल्डलाइफ रीजनल मैनेजर निक डेका ने बताया कि हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बोट्स कहां तक भेजनी हैं। पहले ग्रुप में मिली व्हेल्स में से 90 व्हेल मर चुकी हैं।

10 सालों बाद हुई ऐसी घटना
मैनेजर डेका ने बताया कि तस्मानिया में समुद्र तट की रेत पर पायलट व्हेलों के फंसे होने की घटना कोई नई या असामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर हर दो या तीन हफ्तों में एक बार तस्मानिया में डॉल्फिन और व्हेल के फंसे होने की घटना होती है। तस्मानिया के तट पर इससे पहले 1935 में 294 व्हेल्स के फंसने की घटना हुई थी। 2009 में भी करीब 200 पायलट व्हेल यहां आई थीं।

क्या होती हैं पायलट व्हेल?
पायलट व्हेल समुद्री डॉलफिन की एक प्रजाति है, जो समूह में यात्रा करती हैं। ये समुद्र तट पर अपने समूह के एक लीडर को फॉलो करती हैं और ग्रुप में किसी साथी के घायल हो जाने पर उसके आसपास बड़ी संख्या में इकठ्ठा हो जाती हैं। इस तरह समूह में व्हेलों के फंसने की वजह अभी तक पता नहीं चल पाई है। बताया जाता है कि कई बार कोई एक व्हेल किनारे पर आ जाती है और फिर तकलीफ में दूसरी व्हेलों के पास संकेत भेजती है। उस व्हेल के संकेतों को पाकर दूसरी व्हेलें भी उसके पास आने लगती हैं और फंसती चली जाती हैं।
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