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स्तन से लिक्विड निकलना, गांठ या दर्द होने पर अलर्ट हो जाएं, लक्षण दिखते ही मेमोग्राफी कराएं; इन 7 बातों का ध्यान रखेंगी तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाएगा

भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक सामने आते हैं। इंडियन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, हर 28 में से एक महिला को यह कैंसर होने का खतरा है। ब्रेस्ट कैंसर की 4 स्टेज होती है। अगर कैंसर पहली स्टेज यानी शुरुआती अवस्था में है तो मरीज के ठीक होने की उम्मीद 80 फीसदी तक होती है। दूसरी स्टेज में 60 से 70 फीसदी तक ठीक होने की सम्भावना रहती है। कैंसर की तीसरी या चौथी स्टेज में इलाज थोड़ा कठिन हो जाता है। इसके कुछ लक्षणों को अगर समय पर पहचान लिया जाए तो इलाज आसान हो जाता है।

हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। जानिए ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें और कैसे अलर्ट रहें।

ब्रेस्ट कैंसर के कौन से लक्षण दिखने पर अलर्ट हो जाएं?
इंडियन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, स्तन का सख्त होना, निप्पल से रक्त या लिक्विड निकलना इसके लक्षण हैं। इसके अलावा स्तन में दर्द, बाहों के नीचे भी गांठ होना भी स्तन कैंसर के संकेत हैं। हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद जरूरी है, ताकि आगे चलकर कैंसर का रूप ना ले। इस रोग से डरे नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है। पहली स्टेज में ही अगर इस रोग की पहचान हो जाती है तो इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।

क्यों होता है यह कैंसर
बढ़ती उम्र के अलावा हार्मोनल थैरेपी में दी जाने वाली दवाएं, अधिक उम्र में शादी करने के साथ ही अधिक उम्र में बेबी प्लान करना, आनुवांशिकता, खराब जीवनशैली, अल्कोहल लेने से यह कैंसर हो सकता है। स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ 5-10 प्रतिशत महिलाओं में ही पाया जाता है।

किस उम्र में यह कैंसर होने का खतरा ज्यादा?
आमतौर पर 40 की उम्र के बाद इसकी आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री है तो भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।

कैसे पता लगाएं कैंसर हुआ है या नहीं?
इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देतें। लेकिन सेल्फ एग्जामिनेशन और मैमोग्राम जांच करवाकर इसका पता लगा सकते हैं।अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण भी अलग पाए जाते हैं।

7 गलतियां जो बढ़ाती हैं ब्रेस्ट कैंसर की आशंका

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीतिका दरबारी बता रही हैं ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कब बढ़ता है...

1. बढ़ता मोटापा

महिलाओं का बढ़ता मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। खासतौर पर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बॉडी में ज्यादा हार्मोन्स फैट टिशु से निकलते हैं। बहुत अधिक फैट जब बॉडी पर जमा होने लगता है तो एस्ट्रोजेन का लेवल कम होता है और कैंसर का खतरा बढ़ता है।

2. ब्रेस्ट फीडिंग न कराने पर

अधिकांश महिलाओं का मानना है कि ब्रेस्टफीडिंग कराने से उनका फिगर खराब हो जाता है। इसलिए वे इसे अवॉयड करती हैं। ऐसी महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। दरअसल ब्रेस्टफीडिंग कराने से हार्मोंस बैलेंस में रहते हैं, जबकि जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराती उनमें हार्मोंस का संतुलन बिगड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ती है।

3.खानपान का ध्यान रखने पर

जो महिलाएं अपने खानपान का ध्यान नहीं रखती हैं, उनमें ब्रेस्ट ट्यूमर का खतरा अधिक होता है। ज्यादा मीठा, केचअप, स्पोर्टस ड्रिंक, चॉकलेट मिल्क सहित शुगर युक्त फूड ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करतेहैं। इसी तरह प्रोसेस्ड फूड में मिलने वाला फैट ब्रेस्ट कैंसर की वजह बन सकता है। इसलिए इस तरह की डाइट अवॉयड करें। फास्ट फूड जैसे बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चाट, रेड मीट ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।

4. लम्बे समय से गर्भनिरोधक दवाएं लेने पर

अगर आप लंबे समय तक गर्भनिरोधक दवाएं खाती हैं तो इससे भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इन दवाओं में एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में जरूरत से ज्यादा हो जाए तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। इतना ही नहीं बल्कि बर्थ कंट्रोल इंजेक्शन व अन्य तरीके भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ातेहैं। इसलिए इनके लंबे समय तक उपयोग से बचें।

5. प्लास्टिक की चीजों का अधिक इस्तेमाल

घर में, सफर के दौरान या मीटिंग में प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना या इससे बने बर्तनों में खाना खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। दरअसल प्लास्टिक कंटेनर्स में इंडोक्राइन डिसरप्टिंग कैमिकल जैसा रसायन होता है जो शरीर के हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

6. एक्सरसाइज से दूरी बनाना

जो महिलाएं एक्सरसाइज करने से बचती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मेनोपॉज के बाद तो महिलाओं के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। अगर आपको हेवी एक्सरसाइज पसंद न हो तो रोज आधे घंटे की सैर कर सकती हैं। आप चाहें तो बागवानी या तैराकी जैसे विकल्प चुनकर भी अपनी फिटनेस को मेंटेन कर सकती हैं। इससे पेट और कमर की चर्बी कम करने में भी मदद मिलती है।

7. शराब और स्मोकिंग की लत

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार शराब पीने, स्मोकिंग से स्तन के कैंसर का खतरा 8% तक बढ़ता है। शराब महिलाओं के सेक्स हार्मोन का स्तर बढ़ाती है। जर्नल ऑफ दी अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक शराब से ब्रेस्ट ट्यूमर की ग्रोथ बढ़ती है।



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स्तन से लिक्विड निकलना, गांठ या दर्द होने पर अलर्ट हो जाएं, लक्षण दिखते ही मेमोग्राफी कराएं; इन 7 बातों का ध्यान रखेंगी तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाएगा स्तन से लिक्विड निकलना, गांठ या दर्द होने पर अलर्ट हो जाएं, लक्षण दिखते ही मेमोग्राफी कराएं; इन 7 बातों का ध्यान रखेंगी तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाएगा Reviewed by M Pal on October 05, 2020 Rating: 5

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